Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.59-60h: मैं ही देवताओं और पितरों का पिता हूँ। मैं हयग्रीव रूप धारण करके समुद्र के उत्तर-पश्चिम कोने में निवास करता हूँ और विधिपूर्वक अर्पित किए गए हव्य और भक्तिपूर्वक अर्पित किए गए काव्य का पान करता हूँ। ॥59 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवानां च पितॄणां च पिता ह्येकोऽहमादित:।
अहं हयशिरा भूत्वा समुद्रे पश्चिमोत्तरे॥ ५९॥
पिबामि सुहुतं हव्यं कव्यं च श्रद्धयान्वितम्।
अनुवाद
मैं ही देवताओं और पितरों का पिता हूँ। मैं हयग्रीव रूप धारण करके समुद्र के उत्तर-पश्चिम कोने में निवास करता हूँ और विधिपूर्वक अर्पित किए गए हव्य और भक्तिपूर्वक अर्पित किए गए काव्य का पान करता हूँ। ॥59 1/2॥
'I alone am the father of the gods and the manes as well. I take the form of Hayagriva and reside in the north-west corner of the ocean and drink the oblations offered as per the prescribed rituals and the poetry offered with devotion. ॥ 59 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥