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mahabharat 12.339.57: हे साधुशिरोमणि! मेघ, समुद्र, सरोवर और नदियों को मेरे भीतर समाया हुआ देखो। चारों प्रकार के पितर भी प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं, उन्हें भी देखो॥ 57॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  12.339.57 
अम्भोधरान् समुद्रांश्च सरांसि सरितस्तथा।
मूर्तिमन्त: पितृगणांश्चतुर: पश्य सत्तम॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे साधुशिरोमणि! मेघ, समुद्र, सरोवर और नदियों को मेरे भीतर समाया हुआ देखो। चारों प्रकार के पितर भी प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं, उन्हें भी देखो॥ 57॥
 
‘O Sadhushiromane! See the clouds, the oceans, the lakes and the rivers as embodied within me. The four types of Pitris are also physically visible, see them as well.॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)