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mahabharat 12.339.55-56: आठ प्रकार के ऐश्वर्य भी यहाँ एक ही स्थान पर प्रत्यक्ष रूप में प्रकट हुए हैं, उन्हें देखो। श्री, लक्ष्मी, कीर्ति, पर्वतों सहित पृथ्वी तथा वेदों की माता सरस्वती देवी भी मेरे भीतर विद्यमान हैं, उन सबको देखो। नारद! नक्षत्रों में श्रेष्ठ ध्रुव आकाश में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें भी देखो।' 55-56   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  12.339.55-56 
तथाष्टगुणमैश्वर्यमेकस्थं पश्य मूर्तिमत्।
श्रियं लक्ष्मीं च कीर्तिं च पृथिवीं च ककुद्मिनीम्॥ ५५॥
वेदानां मातरं पश्य मत्स्थां देवीं सरस्वतीम्।
ध्रुवं च ज्योतिषां श्रेष्ठं पश्य नारद खेचरम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
आठ प्रकार के ऐश्वर्य भी यहाँ एक ही स्थान पर प्रत्यक्ष रूप में प्रकट हुए हैं, उन्हें देखो। श्री, लक्ष्मी, कीर्ति, पर्वतों सहित पृथ्वी तथा वेदों की माता सरस्वती देवी भी मेरे भीतर विद्यमान हैं, उन सबको देखो। नारद! नक्षत्रों में श्रेष्ठ ध्रुव आकाश में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें भी देखो।' 55-56
 
‘Eight types of opulence are also manifested in physical form here in one place, look at them. Shri, Lakshmi, Kirti, Earth with mountains and the mother of Vedas Saraswati Devi are also present within me, see them all. Narada! The best among the stars, Dhruv, is visible in the sky, look at him too. 55-56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)