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mahabharat 12.339.53-54: मेरे पृष्ठभाग को भी देखो, जहाँ दोनों दिव्य वैद्य अश्विनीकुमार - नासत्य और दास - स्थित हैं। इनके अतिरिक्त मेरे विभिन्न अंगों में समस्त प्रजापति, सप्तर्षि, सम्पूर्ण वेद, सैकड़ों यज्ञ, औषधियाँ और अमृत को भी देखो। यहाँ तप और विविध प्रकार के यम-नियम भी साक्षात रूप में विद्यमान हैं। 53-54   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 53-54
 
 
श्लोक  12.339.53-54 
नासत्यं चैव दस्रं च भिषजौ पश्य पृष्ठत:।
सर्वान् प्रजापतीन् पश्य पश्य सप्त ऋषींस्तथा॥ ५३॥
वेदान् यज्ञांश्च शतश: पश्यामृतमथौषधी:।
तपांसि नियमांश्चैव यमानपि पृथग्विधान्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
मेरे पृष्ठभाग को भी देखो, जहाँ दोनों दिव्य वैद्य अश्विनीकुमार - नासत्य और दास - स्थित हैं। इनके अतिरिक्त मेरे विभिन्न अंगों में समस्त प्रजापति, सप्तर्षि, सम्पूर्ण वेद, सैकड़ों यज्ञ, औषधियाँ और अमृत को भी देखो। यहाँ तप और विविध प्रकार के यम-नियम भी साक्षात रूप में विद्यमान हैं। 53-54
 
‘Look at my back side also, where both the divine physicians, Ashvinikumar, are situated – Nasatya and Dasra. Apart from them, see all the Prajapatis, Saptarishis, complete Vedas, hundreds of sacrifices, medicines and Amrit in my various parts. Penance and various types of Yama-Niyama are also personified here. 53-54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)