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mahabharat 12.339.51: मेरे क्रोध के कारण मेरे ललाट से मेरे ही रुद्रदेव प्रकट हुए हैं। देखो, ये ग्यारह रुद्र मेरे दाहिनी ओर विराजमान हैं। 51.   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.339.51 
ललाटाच्चैव मे रुद्रो देव: क्रोधाद्विनि:सृत:।
पश्यैकादश मे रुद्रान् दक्षिणं पार्श्वमास्थितान्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
मेरे क्रोध के कारण मेरे ललाट से मेरे ही रुद्रदेव प्रकट हुए हैं। देखो, ये ग्यारह रुद्र मेरे दाहिनी ओर विराजमान हैं। 51.
 
‘Due to my anger, my own Rudradev has appeared from my forehead. Look, these eleven Rudras are seated on my right side. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)