Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.44-45h: मैं निर्गुण, निर्गुण, द्वैत से परे और सत्व से रहित हूँ। तू ऐसा न समझ कि ये सुन्दर होने के कारण दिखाई देते हैं; क्योंकि मैं चाहूँ तो क्षण भर में अदृश्य हो सकता हूँ; क्योंकि मैं सम्पूर्ण जगत् का ईश्वर और गुरु हूँ। ॥44 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं निर्गुण, निर्गुण, द्वैत से परे और सत्व से रहित हूँ। तू ऐसा न समझ कि ये सुन्दर होने के कारण दिखाई देते हैं; क्योंकि मैं चाहूँ तो क्षण भर में अदृश्य हो सकता हूँ; क्योंकि मैं सम्पूर्ण जगत् का ईश्वर और गुरु हूँ। ॥44 1/2॥
‘I am without attributes, without any qualities, beyond duality and void of possessions. You should not think that these are visible because they are beautiful; because I can become invisible in a moment if I wish; because I am the God and Guru of the entire universe. ॥ 44 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥