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mahabharat 12.339.43: जो यहाँ मेरे भक्त हैं, वे मुझमें प्रवेश करके मोक्ष प्राप्त करते हैं। मैं ही पच्चीसवाँ तत्त्व, अक्रिय मनुष्य कहलाऊँगा॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.339.43 
मां प्रविश्य भवन्तीह मुक्ता भक्तास्तु ये मम।
अहं हि पुरुषो ज्ञेयो निष्क्रिय: पञ्चविंशक:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जो यहाँ मेरे भक्त हैं, वे मुझमें प्रवेश करके मोक्ष प्राप्त करते हैं। मैं ही पच्चीसवाँ तत्त्व, अक्रिय मनुष्य कहलाऊँगा॥ 43॥
 
‘Those who are my devotees here, attain liberation by entering into me. I alone am to be known as the twenty-fifth element, the inactive human.॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)