Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.39: उसी से सम्पूर्ण चराचर जगत् उत्पन्न होता है। उसी को 'अनिरुद्ध' और 'ईशान' कहते हैं। वही (कर्म के अभिमान के रूप में) सम्पूर्ण कर्मों में व्यक्त होता है। 39॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् सर्वं सम्भवति जगत् स्थावरजङ्गमम्।
सोऽनिरुद्ध: स ईशानो व्यक्त: स सर्वकर्मसु॥ ३९॥
अनुवाद
उसी से सम्पूर्ण चराचर जगत् उत्पन्न होता है। उसी को 'अनिरुद्ध' और 'ईशान' कहते हैं। वही (कर्म के अभिमान के रूप में) सम्पूर्ण कर्मों में व्यक्त होता है। 39॥
'From Him the entire living world originates. He is called ‘Anirudh’ and ‘Ishaan’. That (in the form of pride of doing) is expressed in all the actions. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥