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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य
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श्लोक 32
श्लोक
12.339.32
नित्यं हि नास्ति जगति भूतं स्थावरजङ्गमम्।
ऋते तमेकं पुरुषं वासुदेवं सनातनम्॥ ३२॥
अनुवाद
इस जगत् में एक सनातन पुरुष (वासुदेव) के अतिरिक्त कोई भी चेतन या अचेतन प्राणी सनातन नहीं है॥ 32॥
'In this world, except the one eternal Being (Vāsudeva), no animate or inanimate being is eternal.॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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