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mahabharat 12.339.27: सत्व, रज और तम - ये तीन गुण सभी शरीरों में निवास करते और विचरण करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.339.27 
सत्त्वं रजस्तमश्चेति गुणानेतान् प्रचक्षते।
यत्ते सर्वशरीरेषु तिष्ठन्ति विचरन्ति च॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सत्व, रज और तम - ये तीन गुण सभी शरीरों में निवास करते और विचरण करते हैं।
 
‘Sattva, Raja and Tama – these three qualities are said to reside and wander in all bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)