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mahabharat 12.339.26: नारद! उस परमेश्वर की महानता और महिमा को देखो, जो कभी भी अच्छे या बुरे कर्मों में लिप्त नहीं होता॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.339.26 
पश्य देवस्य माहात्म्यं महिमानं च नारद।
शुभाशुभै: कर्मभिर्यो न लिप्यति कदाचन॥ २६॥
 
 
अनुवाद
नारद! उस परमेश्वर की महानता और महिमा को देखो, जो कभी भी अच्छे या बुरे कर्मों में लिप्त नहीं होता॥26॥
 
'Narad! Look at the greatness and glory of that Supreme God, who is never involved in good or bad deeds. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)