Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.19: इसलिए कि चन्द्रमा के समान तेजस्वी, इन्द्रिय और आहार से रहित मेरे ये भक्त एकाग्रचित्त होकर मेरा चिन्तन कर सकें और उनके ध्यान में किसी प्रकार का विघ्न न हो, तुम यहाँ से चले जाओ॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसलिए कि चन्द्रमा के समान तेजस्वी, इन्द्रिय और आहार से रहित मेरे ये भक्त एकाग्रचित्त होकर मेरा चिन्तन कर सकें और उनके ध्यान में किसी प्रकार का विघ्न न हो, तुम यहाँ से चले जाओ॥19॥
'So that these devotees of mine, who are as radiant as the moon, devoid of senses and food, can think of me with concentration and there is no disturbance of any kind in their meditation, you should leave from here. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥