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mahabharat 12.339.18: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर ! इस प्रकार दर्शन देकर भगवान ने ब्रह्मापुत्र नारद से पुनः कहा - 'नारद ! जाओ, विलम्ब न करो ॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.339.18 
भीष्म उवाच
एवं संदर्शयित्वा तु नारदं परमेष्ठिनम्।
उवाच वचनं भूयो गच्छ नारद मा चिरम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर ! इस प्रकार दर्शन देकर भगवान ने ब्रह्मापुत्र नारद से पुनः कहा - 'नारद ! जाओ, विलम्ब न करो ॥ 18॥
 
Bhishma says - Yudhishthira! After giving darshan in this manner, the Lord again said to Brahma's son Narada, 'Narad! Go, do not delay.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)