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mahabharat 12.339.140: नैमिषारण्य में निवास करनेवाले प्रायः सभी ऋषिगण वेद के प्रकाण्ड विद्वान् हैं और सभी श्रेष्ठ ब्राह्मण शौनक के इस महान यज्ञ के लिए एकत्रित हुए हैं ॥140॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  12.339.140 
सर्वे वेदविदो मुख्या नैमिषारण्यवासिन:।
शौनकस्य महासत्रं प्राप्ता: सर्वे द्विजोत्तमा:॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
नैमिषारण्य में निवास करनेवाले प्रायः सभी ऋषिगण वेद के प्रकाण्ड विद्वान् हैं और सभी श्रेष्ठ ब्राह्मण शौनक के इस महान यज्ञ के लिए एकत्रित हुए हैं ॥140॥
 
Almost all the Rishis residing at Naimisharanya are eminent Veda scholars and all the best Brahmins have gathered for this great Yagya of Shaunak.॥ 140॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)