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mahabharat 12.339.14: हे ब्राह्मण! धर्म के घर में उत्पन्न हुए नर-नारायण आदि चारों भाई मेरे ही स्वरूप हैं; इसलिए तुम सदैव उनकी पूजा करो और जो भी कार्य मिले, उसे पूर्ण करो॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.339.14 
ममैतास्तनव: श्रेष्ठा जाता धर्मगृहे द्विज।
तास्त्वं भजस्व सततं साधयस्व यथागतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! धर्म के घर में उत्पन्न हुए नर-नारायण आदि चारों भाई मेरे ही स्वरूप हैं; इसलिए तुम सदैव उनकी पूजा करो और जो भी कार्य मिले, उसे पूर्ण करो॥ 14॥
 
O Brahmin! The four brothers Nara-Narayana etc. who have taken birth in the home of Dharma are my manifestations; therefore you should always worship them and accomplish whatever task you get.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)