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mahabharat 12.339.132-133h: हे महाबाहु युधिष्ठिर! ब्राह्मणों के हितैषी, परम बुद्धिमान सनातन पुरुष भगवान जनार्दनदेव आप पर सदैव प्रसन्न रहें।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 132-133h
 
 
श्लोक  12.339.132-133h 
ब्रह्मण्यदेवो भगवान् प्रीयतां ते सनातन:॥ १३२॥
युधिष्ठिर महाबाहो महाबुद्धिर्जनार्दन:।
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु युधिष्ठिर! ब्राह्मणों के हितैषी, परम बुद्धिमान सनातन पुरुष भगवान जनार्दनदेव आप पर सदैव प्रसन्न रहें।
 
Mighty-armed Yudhishthir! May Lord Janardandev, the most intelligent eternal man who is well-wisher of Brahmins, always be pleased with you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)