Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.13: परन्तु वह मुझे देख नहीं सका। वास्तव में मेरे अनन्य भक्त के अतिरिक्त अन्य कोई मुझे देख ही नहीं सकता। तुम मेरे अनन्य भक्तों में श्रेष्ठ हो, इसीलिए तुमने मुझे देखा है॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च मां ते ददृशिरे न च द्रक्ष्यति कश्चन।
ऋते ह्यैकान्तिकश्रेष्ठात् त्वं चैवैकान्तिकोत्तम:॥ १३॥
अनुवाद
परन्तु वह मुझे देख नहीं सका। वास्तव में मेरे अनन्य भक्त के अतिरिक्त अन्य कोई मुझे देख ही नहीं सकता। तुम मेरे अनन्य भक्तों में श्रेष्ठ हो, इसीलिए तुमने मुझे देखा है॥13॥
But he could not see me. In reality no one other than my exclusive devotee can see me. You are the best among my exclusive devotees; that is why you have seen me.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥