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mahabharat 12.339.118: यह पंचरात्र, जो वेदों के समान प्राचीन है, नारद जी ने ब्रह्मा के अतिरिक्त ब्रह्मलोक में निवास करने वाले अन्य सिद्ध समुदायों को सुनाया था।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  12.339.118 
ये त्वन्ये ब्रह्मसदने सिद्धसंघा: समागता:।
तेभ्यस्तच्छ्रावयामास पुराणं वेदसम्मितम्॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
यह पंचरात्र, जो वेदों के समान प्राचीन है, नारद जी ने ब्रह्मा के अतिरिक्त ब्रह्मलोक में निवास करने वाले अन्य सिद्ध समुदायों को सुनाया था।
 
This Pancharatra, which is as ancient as the Vedas, was narrated by Narada to the other Siddha communities who reside in Brahmloka besides Brahma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)