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mahabharat 12.339.117: हे मनुष्यों के स्वामी! वे अपने जन्म के कारण भगवान नारायण को और भी अधिक जानते हैं। वे उन्हें सबके स्वामी और परमेश्वर मानते हैं ॥117॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  12.339.117 
जानाति देवप्रवरं भूयश्चातोऽधिकं नृप।
परमात्मानमीशानमात्मन: प्रभवं तथा॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! वे अपने जन्म के कारण भगवान नारायण को और भी अधिक जानते हैं। वे उन्हें सबके स्वामी और परमेश्वर मानते हैं ॥117॥
 
O Lord of men! They know even more about the God Narayana who is the reason for their birth. They consider him to be the Lord of all and the Supreme Being. ॥ 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)