Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.339.11: इस प्रकार अविनाशी और देवताओं के मूल कारण श्री हरि ने नारदजी से कहा, जो सिर झुकाकर उनके चरणों में गिर पड़े ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.339.11 
तमुवाच नतं मूर्ध्ना देवानामादिरव्यय:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अविनाशी और देवताओं के मूल कारण श्री हरि ने नारदजी से कहा, जो सिर झुकाकर उनके चरणों में गिर पड़े ॥11॥
 
Thus said Shri Hari, the indestructible and root-cause of the gods, to Narada who fell at his feet with his head bowed. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)