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mahabharat 12.339.103-104: द्विजश्रेष्ठ! हंस, कूर्म, मत्स्य, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, दशरथनन्दन राम, यदुवंशी श्रीकृष्ण और कल्कि- ये सभी मेरे अवतार हैं। 103-104॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 103-104
 
 
श्लोक  12.339.103-104 
हंस: कूर्मश्च मत्स्यश्च प्रादुर्भावा द्विजोत्तम॥ १०३॥
वराहो नरसिंहश्च वामनो राम एव च।
रामो दाशरथिश्चैव सात्वत: कल्किरेव च॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! हंस, कूर्म, मत्स्य, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, दशरथनन्दन राम, यदुवंशी श्रीकृष्ण और कल्कि- ये सभी मेरे अवतार हैं। 103-104॥
 
Dwijshreshtha! Hans, Kurma, Matsya, Varaha, Narasimha, Vaman, Parashuram, Dashrathanandan Ram, Yaduvanshi Shri Krishna and Kalki - all these are my incarnations. 103-104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)