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mahabharat 12.339.100: उस समय के लोग कहते थे कि 'ये नर और नारायण नाम के ऋषि, जो ईश्वर के स्वरूप हैं, एक साथ आए हैं और लोगों के कल्याण के लिए क्षत्रिय जाति का संहार कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  12.339.100 
एवं लोका वदिष्यन्ति नरनारायणावृषी।
उद्युक्तौ दहत: क्षत्रं लोककार्यार्थमीश्वरौ॥ १००॥
 
 
अनुवाद
उस समय के लोग कहते थे कि 'ये नर और नारायण नाम के ऋषि, जो ईश्वर के स्वरूप हैं, एक साथ आए हैं और लोगों के कल्याण के लिए क्षत्रिय जाति का संहार कर रहे हैं।
 
People of that time would say that 'These sages named Nara and Narayana, who are in the form of God, have come together and are killing the Kshatriya caste for the welfare of the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)