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mahabharat 12.339.10-11h: उन्हें देखकर प्रसन्न हुए द्विजश्रेष्ठ नारद ने मौन होकर प्रणाम किया और प्रसन्न भगवान की पूजा की ॥10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  12.339.10-11h 
तं प्रसन्नं प्रसन्नात्मा नारदो द्विजसत्तम:॥ १०॥
वाग्यत: प्रणतो भूत्वा ववन्दे परमेश्वरम्।
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर प्रसन्न हुए द्विजश्रेष्ठ नारद ने मौन होकर प्रणाम किया और प्रसन्न भगवान की पूजा की ॥10 1/2॥
 
After seeing him, Dwijashreshtha Narad, who was happy, silently bowed down and worshiped the pleased God. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)