श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.337.d1 
(विरुद्धं वेदसूत्राणामुक्तं यदि भवेन्नृप।
वयं विरुद्धवचना यदि तत्र पतामहे॥ )
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! यदि आपने वेदों और सूत्रों के विरुद्ध बातें कही हैं, तो यह शाप हम पर अवश्य लगेगा और यदि हमने शास्त्रों के विरुद्ध बातें कही हैं, तो हमारा पतन हो जाएगा।
 
'Nareshwar! If you have spoken against the Vedas and sutras, then this curse will definitely be imposed on us and if we have spoken against the scriptures, then we will be downfall.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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