श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.337.6 
भीष्म उवाच
तेषां संवदतामेवमृषीणां विबुधै: सह।
मार्गागतो नृपश्रेष्ठस्तं देशं प्राप्तवान् वसु:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! जिस समय ऋषिगण देवताओं के साथ यह वार्तालाप कर रहे थे, उसी समय महाबली राजा वसु भी उसी ओर से आये और उस स्थान पर पहुँचे।
 
Bhishma says - King! When the sages were having this conversation with the gods, at that very time the great king Vasu also came that way and reached that place.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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