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श्लोक 12.337.40  |
केवलं पुरुषस्तेन सेवितो हरिरीश्वर:।
तत: शीघ्रं जहौ शापं ब्रह्मलोकमवाप च॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| फिर उसने परम पुरुष भगवान् हरि को ही भस्म कर दिया और इस प्रकार वह शीघ्र ही उस शाप से मुक्त होकर ब्रह्मलोक में पहुँच गया ॥40॥ |
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| Then he consumed only the Supreme Being Lord Hari, who was the supreme male, and thus he was soon freed from that curse and reached Brahmaloka. ॥ 40॥ |
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