Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.337.38: उसी क्षण राजा वसु पुनः पुरोहित हो गए और उत्तम शरीर धारण करके ब्रह्मलोक को चले गए ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.337.38 
अस्मिन् मुहूर्ते संजज्ञे राजोपरिचर: पुन:।
सशरीरो गतश्चैव ब्रह्मलोकं नृपोत्तम:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उसी क्षण राजा वसु पुनः पुरोहित हो गए और उत्तम शरीर धारण करके ब्रह्मलोक को चले गए ॥38॥
 
At that very moment King Vasu again became a priest. Then he went to Brahmaloka with the best body. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)