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mahabharat 12.337.34: हे पक्षीराज! वह ब्राह्मणों के क्रोध के कारण पाताल लोक में गया है। फिर भी उसने सदैव श्रेष्ठ ब्राह्मणों का आदर किया है; अतः तुम्हें उसके पास जाना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.337.34 
ब्राह्मणानां प्रकोपेन प्रविष्टो वसुधातलम्।
मानितास्ते तु विप्रेन्द्रास्त्वं तु गच्छ द्विजोत्तम॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे पक्षीराज! वह ब्राह्मणों के क्रोध के कारण पाताल लोक में गया है। फिर भी उसने सदैव श्रेष्ठ ब्राह्मणों का आदर किया है; अतः तुम्हें उसके पास जाना चाहिए।
 
'King of birds! He has entered the netherworld due to the anger of the brahmins. Even then he has always respected the best brahmins; therefore you should go to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)