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mahabharat 12.337.33: हे श्रेष्ठ पक्षी! मेरी आज्ञा से तुम कठोर व्रत करने वाले धर्मात्मा राजा वसु के पास जाओ और उनसे मिलो।   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.337.33 
द्विजोत्तम महाभाग पश्यतां वचनान्मम।
सम्राड् राजा वसुर्नाम धर्मात्मा संशितव्रत:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ पक्षी! मेरी आज्ञा से तुम कठोर व्रत करने वाले धर्मात्मा राजा वसु के पास जाओ और उनसे मिलो।
 
'O great bird! By my order you should go to the righteous King Vasu, who is observing a strict fast and see him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)