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mahabharat 12.337.32: तब वर देनेवाले भगवान विष्णु ने अपने निकट खड़े हुए महाबली पक्षी गरुड़ से अपनी अभीष्ट इच्छा इस प्रकार व्यक्त की - ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.337.32 
वरदो भगवान् विष्णु: समीपस्थं द्विजोत्तमम्।
गरुत्मन्तं महावेगमाबभाषेप्सितं तदा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तब वर देनेवाले भगवान विष्णु ने अपने निकट खड़े हुए महाबली पक्षी गरुड़ से अपनी अभीष्ट इच्छा इस प्रकार व्यक्त की - ॥32॥
 
Then the boon-giving Lord Vishnu expressed his desired desire to the mighty bird Garuda, standing near him, in this manner - ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)