Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.3: यज्ञ अज की सहायता से ही सम्पन्न होना चाहिए - यही नियम है।' ऐसा कहकर देवताओं ने वहाँ उपस्थित समस्त महर्षियों से कहा, 'यहाँ अज का तात्पर्य बकरे से ही समझना चाहिए, अन्य किसी पशु से नहीं, यही निश्चय है।' | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अजेन यष्टव्यमिति प्राहुर्देवा द्विजोत्तमान्।
स च च्छागोऽप्यजो ज्ञेयो नान्य: पशुरिति स्थिति:॥ ३॥
अनुवाद
यज्ञ अज की सहायता से ही सम्पन्न होना चाहिए - यही नियम है।' ऐसा कहकर देवताओं ने वहाँ उपस्थित समस्त महर्षियों से कहा, 'यहाँ अज का तात्पर्य बकरे से ही समझना चाहिए, अन्य किसी पशु से नहीं, यही निश्चय है।'
'The sacrifice should be performed with the help of Aja - this is the rule.' Having said this, the gods told all the great sages present there, 'Here Aja should be understood to mean goat, not any other animal, this is the certainty.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥