Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.24-25: हे निष्पाप राजन! हम आपको एक वरदान देते हैं। जब तक आप शाप के कारण पृथ्वी के छिद्र में रहेंगे, तब तक आपको एकाग्र ब्राह्मणों द्वारा यज्ञों में दी जाने वाली वसुधारा की आहुति प्राप्त होती रहेगी। | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे निष्पाप राजन! हम आपको एक वरदान देते हैं। जब तक आप शाप के कारण पृथ्वी के छिद्र में रहेंगे, तब तक आपको एकाग्र ब्राह्मणों द्वारा यज्ञों में दी जाने वाली वसुधारा की आहुति प्राप्त होती रहेगी।
‘O sinless king! We grant you a favour. As long as you remain in the hole of the earth due to the curse, you will continue to receive the offerings of Vasudhara given in the yagnas by the concentrated Brahmins. 24-25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥