Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.21-22h: राजन्! आप ब्रह्मदेव भगवान विष्णु के भक्त हैं और वे समस्त देवों, देवताओं तथा दैत्यों के गुरु हैं। वे आप पर प्रसन्न हैं, अतः आपकी इच्छानुसार वे आपको अवश्य ही शाप से मुक्त कर देंगे।' | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मण्यदेवभक्तस्त्वं सुरासुरगुरुर्हरि:॥ २१॥
कामं स तव तुष्टात्मा कुर्याच्छापविमोक्षणम्।
अनुवाद
राजन्! आप ब्रह्मदेव भगवान विष्णु के भक्त हैं और वे समस्त देवों, देवताओं तथा दैत्यों के गुरु हैं। वे आप पर प्रसन्न हैं, अतः आपकी इच्छानुसार वे आपको अवश्य ही शाप से मुक्त कर देंगे।'
‘King! You are a devotee of Lord Vishnu, the God of Brahman, and he is the Guru of all the gods, the gods and the demons. His mind is pleased with you; therefore, he will certainly free you from the curse as per your wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥