श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.337.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
ऋषीणां चैव संवादं त्रिदशानां च भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - 'हे भरतनन्दन! इस विषय में विद्वान लोग ऋषियों और देवताओं के संवाद रूपी इस प्राचीन इतिहास को उद्धृत करते हैं।॥ 2॥
 
Bhishma said, 'O Bharatanandan! In this matter, learned people quote this ancient history in the form of dialogue between sages and gods.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd