Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.337.18-19: उस समय भी भगवान नारायण की आज्ञा से उनकी स्मृति उनसे दूर न हो सकी। इधर सभी देवता एकत्रित होकर राजा को शाप से मुक्त करने का उपाय सोचने लगे। वे शांत भाव से एक-दूसरे से बोले - 'राजा ने केवल पुण्य कर्म ही किए हैं। उस महाबली राजा को यह शाप हमारे ही कारण मिला है।॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्मृतिस्त्वेनं न हि जहौ तदा नारायणाज्ञया।
देवास्तु सहिता: सर्वे वसो: शापविमोक्षणम्॥ १८॥
चिन्तयामासुरव्यग्रा: सुकृतं हि नृपस्य तत्।
अनेनास्मत्कृते राज्ञा शाप: प्राप्तो महात्मना॥ १९॥
अनुवाद
उस समय भी भगवान नारायण की आज्ञा से उनकी स्मृति उनसे दूर न हो सकी। इधर सभी देवता एकत्रित होकर राजा को शाप से मुक्त करने का उपाय सोचने लगे। वे शांत भाव से एक-दूसरे से बोले - 'राजा ने केवल पुण्य कर्म ही किए हैं। उस महाबली राजा को यह शाप हमारे ही कारण मिला है।॥18-19॥
Even at that time, by the order of Lord Narayana, his memory could not leave him. Here all the gods gathered together and started thinking of a way to free the king from the curse. They calmly spoke to each other - 'The king has done nothing but good deeds. That great king has received this curse because of us.॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥