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mahabharat 12.337.17: राजन! ऋषियों के ऐसा कहते ही राजा उपरिचर आकाश से उतरकर तुरंत पृथ्वी की गहराइयों में चले गए॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.337.17 
ततस्तस्मिन् मुहूर्तेऽथ राजोपरिचरस्तदा।
अधो वै सम्बभूवाशु भूमेर्विवरगो नृप॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजन! ऋषियों के ऐसा कहते ही राजा उपरिचर आकाश से उतरकर तुरंत पृथ्वी की गहराइयों में चले गए॥17॥
 
Rajan! As soon as the sages said this, King Uparichar came down from the sky and immediately entered the depths of the earth. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)