श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  12.337.15-16 
सुरपक्षो गृहीतस्ते यस्मात् तस्माद् दिव: पत॥ १५॥
अद्यप्र्रभृति ते राजन्नाकाशे विहता गति:।
अस्मच्छापाभिघातेन महीं भित्त्वा प्रवेक्ष्यसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजन! तुमने यह जानते हुए भी कि अज का अर्थ अन्न है, देवताओं का पक्ष लिया है; अतः स्वर्ग से नीचे गिर जाओ। आज से तुम्हारी आकाश में विचरण करने की शक्ति नष्ट हो गई। हमारे शाप के प्रहार से तुम पृथ्वी को भेदकर पाताल में प्रवेश कर जाओगे ॥15-16॥
 
'King! You have taken the side of the gods even after knowing that Aja means food; Therefore fall down from heaven. From today onwards your power to roam in the sky has been destroyed. Due to the blow of our curse, you will penetrate the earth and enter the underworld. 15-16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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