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mahabharat 12.337.13-14h: भीष्म कहते हैं - हे राजन! देवताओं का मत जानकर राजा वसु ने उनका पक्ष लिया और कहा कि अज का अर्थ बकरा है, अतः उसी बकरे से यज्ञ सम्पन्न करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  12.337.13-14h 
भीष्म उवाच
देवानां तु मतं ज्ञात्वा वसुना पक्षसंश्रयात्॥ १३॥
छागेनाजेन यष्टव्यमेवमुक्तं वचस्तदा।
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! देवताओं का मत जानकर राजा वसु ने उनका पक्ष लिया और कहा कि अज का अर्थ बकरा है, अतः उसी बकरे से यज्ञ सम्पन्न करना चाहिए।
 
Bhishma says - O King! After knowing the opinion of the Gods, King Vasu took their side and said that Aja means goat; hence the sacrifice should be performed with the help of that goat. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)