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mahabharat 12.337.12-13h: ऋषि बोले - हे मनुष्यों! हमारा मत है कि अन्न से यज्ञ करना चाहिए और देवताओं का मत है कि बकरे से यज्ञ करना चाहिए। राजन! अब आप अपना निर्णय बताइए।   |   mahabharat अध्याय 12.337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  12.337.12-13h 
ऋषय ऊचु:
धान्यैर्यष्टव्यमित्येव पक्षोऽस्माकं नराधिप॥ १२॥
देवानां तु पशु: पक्षो मतो राजन् वदस्व न:।
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले - हे मनुष्यों! हमारा मत है कि अन्न से यज्ञ करना चाहिए और देवताओं का मत है कि बकरे से यज्ञ करना चाहिए। राजन! अब आप अपना निर्णय बताइए।
 
The sage said - O Lord of men! Our opinion is that the sacrifice should be performed with food grains and the opinion of the gods is that the sacrifice should be performed with the animal called goat. King! Now you tell us your decision. 12 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)