श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 337: यज्ञमें आहुतिके लिये अजका अर्थ अन्न है, बकरा नहीं—इस बातको जानते हुए भी पक्षपात करनेके कारण राजा उपरिचरके अध:पतनकी और भगवत्कृपासे उनके पुनरुत्थानकी कथा  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  12.337.11-12h 
स तान् कृताञ्जलिर्भूत्वा परिपप्रच्छ वै वसु:॥ ११॥
कस्य वै को मत: कामो ब्रूत सत्यं द्विजोत्तमा:।
 
 
अनुवाद
तब राजा वसु ने हाथ जोड़कर उनसे पूछा, "हे ब्राह्मणो! सच-सच बताओ। तुम लोगों में से कौन सा पक्ष किस मत का समर्थक है? कौन 'अज' का अर्थ बकरा मानता है और कौन उसे अन्न मानता है?"
 
Then King Vasu folded his hands and asked them, "O Brahmins! Tell me the truth. Which side among you wants which opinion? Who considers the meaning of 'Aja' to be goat and who considers it to be food?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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