Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.7-9: इनके अलावा (तेरह सदस्य और थे, जिनके नाम इस प्रकार हैं-) धनुष, रैभ्य, अर्वावसु, परावसु, मुनिवर मेधातिथि, महर्षि तंड, महाभाग शांतिमुनि, वेदशिरा, शालिहोत्र के पिता ऋषि कपिल, आद्यकथ, वैशम्पायन के बड़े भाई तैत्तिर, कण्व और देवहोत्र। ये कुल मिलाकर सोलह सदस्य बताये जाते हैं। 7-9॥ | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इनके अलावा (तेरह सदस्य और थे, जिनके नाम इस प्रकार हैं-) धनुष, रैभ्य, अर्वावसु, परावसु, मुनिवर मेधातिथि, महर्षि तंड, महाभाग शांतिमुनि, वेदशिरा, शालिहोत्र के पिता ऋषि कपिल, आद्यकथ, वैशम्पायन के बड़े भाई तैत्तिर, कण्व और देवहोत्र। ये कुल मिलाकर सोलह सदस्य बताये जाते हैं। 7-9॥
Apart from these (there were thirteen more members, whose names are as follows—) Dhanush, Raibhya, Arvavasu, Paravasu, Munivar Medhatithi, Maharishi Tand, Mahabhag Shantimuni, Vedshira, Shalihotra's father sage Kapil, Adyakath, Vaishampayan's elder brother Taittiri, Kanva and Devhotra. These are said to be sixteen members in total. 7-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥