Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.58-59h: बृहस्पति! इस प्रकार हमने घोर तप किया, हवन और यज्ञों से भगवान की पूजा की, फिर भी हम उन्हें नहीं देख पाए। फिर आप उन्हें सहजता से कैसे देख पाएँगे?॥58 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सुतपसा चैव हव्यकव्यैस्तथैव च॥ ५८॥
देवोऽस्माभिर्न दृष्ट: स कथं त्वं द्रष्टुमर्हसि।
अनुवाद
बृहस्पति! इस प्रकार हमने घोर तप किया, हवन और यज्ञों से भगवान की पूजा की, फिर भी हम उन्हें नहीं देख पाए। फिर आप उन्हें सहजता से कैसे देख पाएँगे?॥58 1/2॥
'Brihaspati! In this way we performed great penance, worshipped the Lord with oblations and sacrifices, but still we could not see Him. Then how will you be able to see Him effortlessly?॥ 58 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥