Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.57-58h: अमृत के समान मधुर और अद्भुत इन वचनों को सुनकर प्रभु की कृपा से हम बिना किसी प्रयास के ही अपने इच्छित गंतव्य पर पहुँच गए। | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अमृत के समान मधुर और अद्भुत इन वचनों को सुनकर प्रभु की कृपा से हम बिना किसी प्रयास के ही अपने इच्छित गंतव्य पर पहुँच गए।
‘Having heard these words, which are as sweet as nectar and are wonderful, by the grace of the Lord we without any effort reached our desired destination. 57 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥