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mahabharat 12.336.55-57h: विप्रवरो! इस समय भी तुम्हें बहुत बड़ा कार्य करना है। इस सत्ययुग के समाप्त होने पर जब धर्म में कुछ विघ्न पड़ेगा और वैवस्वत मन्वन्तर का त्रेतायुग आरम्भ होगा, उस समय तुम देवताओं के कार्य सिद्धि में सहायक होगे। 55-56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 55-57h
 
 
श्लोक  12.336.55-57h 
महत् कार्यं च कर्तव्यं युष्माभिर्द्विजसत्तमा:॥ ५५॥
इत: कृतयुगेऽतीते विपर्यासं गतेऽपि च।
वैवस्वतेऽन्तरे विप्रा: प्राप्ते त्रेतायुगे पुन:॥ ५६॥
सुराणां कार्यसिद्धॺर्थं सहाया वै भविष्यथ।
 
 
अनुवाद
विप्रवरो! इस समय भी तुम्हें बहुत बड़ा कार्य करना है। इस सत्ययुग के समाप्त होने पर जब धर्म में कुछ विघ्न पड़ेगा और वैवस्वत मन्वन्तर का त्रेतायुग आरम्भ होगा, उस समय तुम देवताओं के कार्य सिद्धि में सहायक होगे। 55-56 1/2॥
 
Vipravaro! At this time you still have a big work to do. After the completion of this Satyayuga, when there will be some disturbance in the religion and Tretayuga of Vaivaswat Manvantar will begin, at that time you will be helpful in the accomplishment of the work of the Gods. 55-56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)