Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.53-54h: मुनियों! आप सभी लोग जैसे आये थे वैसे ही वापस चले जाएँ। भगवान के प्रति अनन्य भक्ति के बिना किसी को भी उनका प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो सकता। | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गच्छध्वं मुनय: सर्वे यथागतमितोऽचिरात्॥ ५३॥
न स शक्यस्त्वभक्तेन द्रष्टुं देव: कथंचन।
अनुवाद
मुनियों! आप सभी लोग जैसे आये थे वैसे ही वापस चले जाएँ। भगवान के प्रति अनन्य भक्ति के बिना किसी को भी उनका प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो सकता।
Munis! All of you should return as soon as you came. Without having exclusive devotion towards God, no one can have a direct darshan of Him in any way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥