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mahabharat 12.336.51-52h: तपस्या की थकान के कारण हम लोग बहुत दुर्बल हो गए थे। उस समय एक स्वस्थ शरीरधारी जीव (देवता) ने हमसे कहा ।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  12.336.51-52h 
ततोऽस्मान् सुपरिश्रान्तांस्तपसा चातिकर्शितान्॥ ५१॥
उवाच स्वस्थं किमपि भूतं तत्राशरीरकम्।
 
 
अनुवाद
तपस्या की थकान के कारण हम लोग बहुत दुर्बल हो गए थे। उस समय एक स्वस्थ शरीरधारी जीव (देवता) ने हमसे कहा ।
 
‘We had become very weak due to the fatigue of penance. At that time a bodiless healthy being (god) said to us. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)