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mahabharat 12.336.49-50h: वहाँ हजारों शुद्ध कुल के लोग थे; परन्तु उनमें से किसी ने भी मन या दृष्टि से हमारा स्वागत नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  12.336.49-50h 
मानवानां सहस्रेषु तेषु वै शुद्धयोनिषु॥ ४९॥
अस्मान् न कश्चिन्मनसा चक्षुषा वाप्यपूजयत्।
 
 
अनुवाद
वहाँ हजारों शुद्ध कुल के लोग थे; परन्तु उनमें से किसी ने भी मन या दृष्टि से हमारा स्वागत नहीं किया।
 
‘There were thousands of men of pure families there; but none of them welcomed us even by mind or sight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)