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mahabharat 12.336.48-49h: हे बृहस्पति! जब सुगन्धित वायु का बहना बन्द हो गया और भगवान को बलि देने का कार्य पूरा हो गया, तब हम मन ही मन चिन्तित हो उठे।   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  12.336.48-49h 
मारुते संनिवृत्ते च बलौ च प्रतिपादिते॥ ४८॥
चिन्ताव्याकुलितात्मानो जाता: स्मोऽङ्गिरसां वर।
 
 
अनुवाद
हे बृहस्पति! जब सुगन्धित वायु का बहना बन्द हो गया और भगवान को बलि देने का कार्य पूरा हो गया, तब हम मन ही मन चिन्तित हो उठे।
 
'Jupiter! When the fragrant wind stopped blowing and the act of offering sacrifice to the Lord was completed, we became worried in our hearts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)