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mahabharat 12.336.47-48h: जिस प्रकार उन्होंने हमसे बात की, उससे हमें विश्वास हो गया कि प्रभु अवश्य यहाँ आये हैं, परन्तु उनकी माया से मोहित होने के कारण हम उन्हें देख नहीं पा रहे थे ॥47 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  12.336.47-48h 
नूनं तत्रागतो देवो यथा तैर्वागुदीरिता॥ ४७॥
वयं त्वेनं न पश्यामो मोहितास्तस्य मायया।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार उन्होंने हमसे बात की, उससे हमें विश्वास हो गया कि प्रभु अवश्य यहाँ आये हैं, परन्तु उनकी माया से मोहित होने के कारण हम उन्हें देख नहीं पा रहे थे ॥47 1/2॥
 
'The way he talked to us convinced us that the Lord had definitely come here, but because we were bewildered by his illusion, we were unable to see him. ॥ 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)