Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.336.45-47h: हमने उपदेश और अक्षर से परिपूर्ण यह वाक्य सुना।' उसी समय शुद्ध और सुगन्धित वायु अनेक दिव्य पुष्प और औषधियाँ लेकर आई, जिनसे उस स्थान के अनन्य भक्तों ने, पाँचों कालों के ज्ञाता, मन, वाणी और कर्म से बड़ी भक्तिपूर्वक श्रीहरि की पूजा की। | mahabharat अध्याय 12.336: राजा उपरिचरके यज्ञमें भगवान्पर बृहस्पतिका क्रोधित होना, एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान् की महिमाका वर्णन करके उनको शान्त करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हमने उपदेश और अक्षर से परिपूर्ण यह वाक्य सुना।' उसी समय शुद्ध और सुगन्धित वायु अनेक दिव्य पुष्प और औषधियाँ लेकर आई, जिनसे उस स्थान के अनन्य भक्तों ने, पाँचों कालों के ज्ञाता, मन, वाणी और कर्म से बड़ी भक्तिपूर्वक श्रीहरि की पूजा की।
‘We heard this sentence, full of teachings and letters. Meanwhile, the pure and fragrant wind brought many divine flowers and medicinal herbs, with which the exclusive devotees of the place, having knowledge of the five times, worshipped Shri Hari with great devotion through mind, speech and action.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥